➤ सीएम सुक्खू के निर्देश– मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कॉमर्स तीनों संकाय होंगे शुरू
➤ ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का फोकस, कई स्कूलों में 90% तक वृद्धि
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न लागू करने की पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं। मौजूदा शैक्षणिक सत्र से राज्य के 151 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई प्रणाली लागू किए जाने के बाद छात्र नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ते रुझान को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इन सभी स्कूलों में मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कॉमर्स तीनों शैक्षणिक संकाय शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को तय समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि छात्रों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध हो सके। सरकार का मानना है कि इस कदम से सरकारी स्कूलों की ओर छात्रों का भरोसा और बढ़ेगा।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई स्कूलों में नामांकन में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। चंबा जिले के किलाड़ स्कूल में छात्र संख्या में 90.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मंडी के जंजैहली में यह बढ़ोतरी 90.43 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह किन्नौर के रिकांगपिओ में 50.50 प्रतिशत, शिमला के नेरवा में 52.22 प्रतिशत और घनाहट्टी में 26.27 प्रतिशत की वृद्धि सामने आई है।
इसके अलावा लाहौल-स्पीति के काजा में 23.40 प्रतिशत, ठियोग में 16.19 प्रतिशत, नौहराधार में 29.69 प्रतिशत और चौपाल में 28.16 प्रतिशत नामांकन बढ़ा है। इन आंकड़ों ने शिक्षा विभाग और सरकार दोनों को उत्साहित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के गठन के बाद शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के चलते हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। साथ ही प्रदेश ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव भी हासिल किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी शहरी स्तर की शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में इस दिशा में और ठोस फैसले लिए जाएंगे, ताकि सरकारी स्कूलों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।



